Latest News
Home प्रादेशिक खबरेंगोवा ऑक्सीजन ना मिलने पर गोवा के अस्पताल में 26 मरीजों की मौत, क्यों न कही जाए हत्या?

ऑक्सीजन ना मिलने पर गोवा के अस्पताल में 26 मरीजों की मौत, क्यों न कही जाए हत्या?

by Khabartakmedia

गोवा के एक अस्पताल से दर्दनाक खबर सामने आई है। गोवा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) में एक ही दिन में 48 कोविड मरीजों की मौत हो गई। गत मंगलवार यानी 11 मई को यह घटना घटी है। मंगलवार को पूरे गोवा में कुल 75 लोगों की मौत कोरोना से हुई थी। यह गोवा में मौत का अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा था। लेकिन GMCH में 26 मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी से बताई जा रही है। ऑक्सीजन की कमी से मौत के सवाल पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे में मतभेद दिखा।

गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा है कि “GMCH में बुधवार की सुबह 2 से 6 बजे के बीच 26 मरीजों की मौत हो गई। इनकी मृत्यु ऑक्सीजन की कमी से हुई है।” विश्वजीत राणे ने यह जानकारी दी कि “GMCH में सोमवार को 1200 जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत थी। लेकिन सिर्फ 400 सिलेंडर की आपूर्ति ही अस्पताल में हुई। जिसके कारण ऑक्सीजन की किल्लत हो गई।” जिसका परिणाम ये हुआ कि 26 मरीजों की मौत हो गई। क्या इसे मौत कहा जाना उचित है? क्या ये हत्या नहीं है? क्या इस हत्या में राज्य सरकार की भूमिका को अनदेखा किया जा सकता है?

गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे

मुख्यमंत्री क्या बोले:

गोवा में भाजपा की सरकार है। प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री हैं। मंगलवार को प्रमोद सावंत GMCH अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक किया। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा है कि “ऑक्सीजन की आपूर्ति में देरी के वजह से अस्पताल में ऑक्सीजन के बहाव में गिरावट आई। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि इसी वजह से मरीजों की मौत हुई है।

सीएम प्रमोद सावंत से जब स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे के बयान पर सवाल पूछा गया तब उन्होंने कहा कि “हमें पूरी जानकारी लेनी होगी।” इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रमोद सावंत ने यह भी कहा है कि “कितने मरीजों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हुई? इसका जवाब डाक्टर देंगे। मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूं।”

कमेटी करेगी जांच:

गोवा सरकार की ओर से मामले की तफ्तीश के लिए तीन सदस्यों की एक टीम बनाई गई है। इसमें तीन नोडल अधिकारी शामिल हैं। ये टीम GMCH अस्पताल में चल रही इलाज को लेकर राज्य सरकार को जानकारी देगी। स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा है कि “वास्तव में यह ज्यादा अच्छा होगा उच्च न्यायालय अपनी ओर से एक कमेटी का गठन करे। जो इस घटना कि पूरी जांच करे।”

विश्वजीत राणे ने यह भी कहा है कि “प्रमोद सावंत को किसी ने ‘Misguide’ या फिर ‘Misinterpret’ किया है।

उभरते सवाल:

गोवा के स्वास्थ्य मंत्री सीधे तौर पर 26 मरीजों के मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी को बता रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री इससे अलग बयान दे रहे हैं। सीएम के अनुसार अभी यह देखना होगा कि कितने लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है? सवाल है कि यदि स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे के पास यह जानकारी है तो सीएम प्रमोद सावंत के पास क्यों नहीं? गौरतलब है कि देश के अलग अलग राज्यों से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत से लोगों की जान गई है। वो भी तब जबकि अस्पताल पहले ही ऑक्सीजन की आपूर्ति में हो रही कमी की जानकारी दे रहे हैं।

सरकारों को ऑक्सीजन के कमी की जानकारी होते हुए भी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। ऐसी स्थिति में जिन लोगों की मौत हो रही है क्या वो सिर्फ मौत है? क्या कोई एक भी वजह है जिसके चलते इसे हत्या ना कहा जाए? ये नरसंहार नहीं तो क्या है? इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ऐसी घटनाओं पर कहा है कि ये “नरसंहार से कम नहीं”। ये सांसों के बिना तड़पकर मर जाने की घटना नहीं है! ये सांसों के बगैर तड़पाकर मार देने की घटना है।

Related Articles

Leave a Comment