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बिहार चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रही है राजनीतिक दलें अपनी-अपनी चाल चलते जा रहे हैं। सीटों के बंटवारे पर अलग-अलग गठबंधनों में टूट भी पड़ रही है और नए समीकरण भी बनते जा रहे हैं। हालांकि जिन बातों के आसार पहले से लगाए जा रहे थे बिहार चुनाव का फिल्मांकन ठीक उसी पटकथा पर होती नजर आ रही है। बिहार में युवाओं को रिझाने के लिए “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” के रास्ते पर चल रहे चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी अब जद(यू)- भाजपा गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने जा रही है। लोजपा के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल खालिक ने आज गठबंधन और आगामी बिहार चुनाव पर अपने पार्टी के फैसले को मीडिया के सामने रखा और इसी के साथ यह औपचारिक ऐलान किया कि लोजपा नीतीश के नेतृत्व वाली गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेगी। अब्दुल खालिक ने कहा कि “लोजपा वैचारिक अंतर की वजह से आगामी बिहार विधानसभा चुनाव जनता दल यूनाइटेड के गठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी।” हालांकि खालिक ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर उनका गठजोड़ भाजपा के साथ बना रहेगा। गौरतलब है कि इस स्थिति कि संभावना राजनीतिक विद्वानों ने पहले ही लगाई थी। कहा जा रहा है कि यह नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जद (यू) को कमजोर करने के लिए भाजपा की रणनीति है। भाजपा नीतीश कुमार को सीधे किनारे नहीं लगाना चाहती क्योंकि इससे भाजपा का ही नुक़सान हो जाएगा। इसलिए बीजेपी चिराग पासवान और लोजपा के कंधे पर बंदूक रखकर नीतीश को निशाना बना रही है।

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