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सुशांत सिंह राजपूत के अंत पर शुरू हो सकती है बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की राजनीतिक पारी

by Khabartakmedia

गत मंगलवार को बिहार के चर्चित डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लिया है। गुप्तेश्वर पांडेय द्वारा वीआरएस की अर्जी को बिहार के राज्यपाल ने मंजूरी भी से दी है। ऐसे में अब यह कयास लगाई जा रही है कि गुप्तेश्वर पांडेय बिहार की राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं। साथ ही कहा जा रहा है कि गुप्तेश्वर पांडेय आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड की ओर से एक प्रत्याशी के रूप में उतर सकते हैं। हालांकि मीडिया रपटों में उनकी चुनावी सीट को लेकर भी कई बातें चल रही हैं, जिनमें लगातार बक्सर का नाम सामने आ रहा है।
सुशांत सिंह राजपूत मामले में खूब रहे सुर्खियों में:
गुप्तेश्वर पांडेय पुलिस विभाग के उच्च पदों पर रहते हुए मीडिया में अक्सर बने रहते थे। उन्हें बिहार की नीतीश कुमार सरकार के लिए संकटमोचक माना जाता रहा है। लेकिन हाल के दिनों में गुप्तेश्वर पांडेय ने टेलीविज़न न्यूज चैनलों को खूब मसाला परोसा। सुशांत सिंह राजपूत मामले में जैसे ही पटना पुलिस ने प्रवेश किया गुप्तेश्वर पांडेय के बयानात शुरू हो गए। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत के पिता के. के. सिंह ने पटना में सुशांत की मृत्यु के बाद अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद पटना पुलिस की एक टीम मुंबई जांच करने पहुंची थी। उसके बाद तमाम राजनीतिक खिलवाड़ हुए और जमकर बयानबाजी भी हुई। गुप्तेश्वर पांडेय इस दौरान खूब चहलकदमी करते रहे। उन्होंने मीडिया चैनलों को खुल्लमखुल्ला खूब सारे इंटरव्यू दिए। उनमें कई बार वे विवादित बयान भी दे गए, जो की मीडिया के लिए टीआरपी का मसाला था। गुप्तेश्वर पांडेय पर तब खूब बहस छिड़ी जब उन्होंने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती पर कहा कि “रिया चक्रवर्ती की औकात नहीं है कि वो नीतीश कुमार पर बोले।” एक महिला के लिए “औकात” जैसे शब्द वो भी किसी पुलिस अधिकारी से सुनना लोगों के लिए नागवार गुजरा और गुप्तेश्वर पांडेय पर खूब सवाल उठे। सुशांत मामले में उनकी सक्रियता और बयानों को सुनकर सोशल मीडिया में यह चर्चा तेज हो चुकी थी कि गुप्तेश्वर पांडेय जल्द ही “खाकी वर्दी” से “खादी कुर्ते” में नजर आएंगे। लेकिन फिर इन चर्चाओं पर विराम लग गया था। हालांकि अब गुप्तेश्वर पांडेय के वीआरएस लेने की खबर सामने आई है तो यह बहस फिर छिड़ गई है कि किस प्रकार गुप्तेश्वर पांडेय ने सुशांत सिंह राजपूत मामले की पुलिया पर चढ़कर खाकी से खादी तक का सफर तय किया है।

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