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Home महापुरुष- जन्मदिन/पुण्यतिथि लाल बहादुर वर्मा को काशी विद्यापीठ ने बनाया लाल बहादुर शास्त्री

लाल बहादुर वर्मा को काशी विद्यापीठ ने बनाया लाल बहादुर शास्त्री

by Khabartakmedia

असहयोग आंदोलन को बढ़ाने और देशप्रेम की अलख जगाने के लिए महात्मा गांधी ने काशी में विद्यापीठ की नींव रखी थी। राष्ट्रपिता की पांचवीं यात्रा के दौरान 10 फरवरी 1921 को काशी विद्यापीठ का शिलान्यास हुआ था। बापू ने ही काशी विद्यापीठ की आधारशिला रखी थी। भाषण के दौरान कहा था कि मेरी प्रार्थना है कि प्रतिदिन विद्यापीठ की वृद्धि हो और राक्षसी सल्तनत को मिटाने या इसे दुरुस्त करने में हिस्सा ले। पद्मश्री राजेश्वर आचार्य अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहते हैं कि बात 1962-63 की है। प्रधानमंत्री बनने के बाद पं. लाल बहादुर शास्त्री दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव में शामिल होकर लौट रहे थे, बीएचयू के छात्रों ने जब अपने पीएम को देखा तो उन्होंने हर हर महादेव का जयघोष कर उनका अभिनंदन किया। दिल्ली में हर हर महादेव का जयघोष सुनकर पीएम के कदम थम गए। प्रोटोकॉल तोड़कर शास्त्री जी छात्रों के पास पहुंचे। उनसे मुलाकात की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाई। विद्यार्थियों की टीम में पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य बतौर सांस्कृतिक सचिव शामिल हुए थे।
काशी विद्यापीठ के प्रो. सतीश राय ने बताया कि महात्मा गांधी पांचवीं काशी यात्रा पर 9 फरवरी 1921 को आए। पहले दिन उन्होंने टाउनहाल में जनसभा की। विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का इस सभा में आह्वान किया। दस फरवरी को काशी विद्यापीठ का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि असहयोग को बढ़ाने के लिए ही विद्यापीठ की स्थापना हुई है।यही हमारा एकमात्र शस्त्र है। जितने विद्यालय अंग्रेजी हुकूमत के नियंत्रण में हैं वहां विद्या नहीं लेनी चाहिए। अंग्रेजी झंडा जहां फहराता है वहां पर विद्या का दान लेना पाप है। हमारा दूसरा कर्तव्य है मातृभाषा को विकसित करना।प्रो. नलिन श्याम कामिल ने बताया कि छठवीं यात्रा में बापू 17 अक्तूबर 1925 में विद्यापीठ आए। बापू ने कहा था कि रचनात्मक कार्यों में चरखे का स्थान प्रथम है। यह चरखा ही भारत के स्वावलंबन का प्रतीक है। देश को दरिद्रता से मुक्ति दिलाने के लिए चरखे को छोड़कर दूसरा कोई उपाय नहीं है। सातवीं यात्रा के दौरान जनवरी 1927 में बीएचयू के छात्रों को खादी खरीदने और पहनने का मंत्र दिया।देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री काशी विद्यापीठ के पुरातन छात्र रह चुके हैं। काशी विद्यापीठ ने ही लाल बहादुर वर्मा को लाल बहादुर शास्त्री बना दिया। अपने यशस्वी छात्र को काशी विद्यापीठ आज भी गौरव के साथ नमन करता है। हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने बताया कि शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से ही 1925 में स्नातक की डिग्री हासिल की। इस डिग्री को उस समय शास्त्री कहा जाता था। लाल बहादुर शास्त्री ने विद्यापीठ से ही अपने नाम के आगे शास्त्री लगाना शुरू किया। पहले उनका नाम लाल बहादुर वर्मा था। दर्शन उनका पसंदीदा विषय था। काशी विद्यापीठ में उनकी स्मृति में एक छात्रावास भी है।

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