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भारत के वो दिग्गज जो 2020 में कह गए दुनिया को अलविदा…

by Khabartakmedia

इरफ़ान खान

इरफ़ान खान का जन्म 7 जनवरी, 1967 को राजस्थान में हुआ था। हिन्दी सिनेमा से लेकर हॉलीवुड तक अपनी अभिनय से लाखों दर्शकों का दिल जीत चुके इरफ़ान खान ने अपने करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी। उन्होंने चाणक्य और चंद्रकांता जैसे धारावाहिक में काम किया पहली बार सलाम बॉम्बे नामक हिन्दी फिल्म में बड़े पर्दे पर दिखे थे। इलाहाबाद के छात्रसंघ पर आधारित हासिल फिल्म से इरफ़ान ने अपनी पहचान बनाई। जबकि स्लमडॉग मिलिनेयर और लाइफ ऑफ पाई जैसी अंग्रेजी फिल्मों ने दुनिया भर में उनके अभिनय का झंडा बुलंद किया। 2020 की अंग्रेजी मीडियम इरफ़ान खान के जीवन की आखिरी सिनेमाई मौजूदगी रही। इरफ़ान खान का निधन 29 अप्रैल को मुंबई के एक अस्पताल में हुआ।

ऋषि कपूर

ऋषि कपूर हिन्दी फिल्मी जगत में ख्यातिलब्ध राज कपूर के बेटे थे। अपने सदाबहार एक्टिंग के लिए लोकप्रिय ऋषि कपूर का जन्म 4 सितम्बर, 1952 को मुंबई में हुआ था। फिल्मी परिवार से होने के कारण ऋषि कपूर के लिए इस क्षेत्र में दरवाजे खुले हुए थे। 1974 में लोगों के दिमाग पर छा जाने वाली फिल्म बॉबी, जिसका इस्तेमाल तात्कालिक इंदिरा गांधी सरकार ने अपनी राजनीतिक लाभ के लिए भी किया में ऋषि कपूर ने मुख्य किरदार निभाया था। ऋषि कपूर की छवि एक रोमांटिक हीरो की रही है। अपने शानदार अभिनय के दम पर उन्होंने हिंदी फिल्म जगत में अपनी जगह मजबूत की और कई पुरस्कार जीते। 30 अप्रैल को मुंबई के एक अस्पताल में ऋषि कपूर ने आखिरी सांस ली।

सुशांत सिंह राजपूत

मूलतः बिहार से आने वाले सुशांत सिंह राजपूत का जन्म 21 जनवरी, 1986 को पटना में हुआ था। सुशांत पढ़ने में तेज तर्रार छात्र थे और उनकी रुचि विज्ञान के क्षेत्र में थी। लेकिन अचानक उनका रुख सिनेमा की दुनिया की ओर हो गया। सुशांत सिंह राजपूत ने किस देश में है मेरा दिल नाम के एक धारावाहिक से अपने करियर की शुरुआत की लेकिन पवित्र रिश्ता नाम के धारावाहिक से उन्हें प्रसिद्धि हासिल हुई। 2013 में काय पो छे नाम के फिल्म से उन्होंने बड़े पर्दे पर पदार्पण किया। आमिर खान और अनुष्का शर्मा की सुपर हिट फिल्म पीके में भी उन्होंने काम किया। लेकिन फिल्मी दुनिया में उनकी अभिनय का लोहा तब माना गया जब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर बनी फिल्म एमएस धोनी the untold story आई। 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की लाश संदिग्ध हालात में उनके मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में पंखे से लटकी हुई मिली।

अमर सिंह

भारतीय राजनीति में एक मजबूत नाम अमर सिंह का जन्म 27 जनवरी, 1956 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। अमर सिंह एक बहुचर्चित राजनेता के साथ साथ अभिनेता भी थे। अमर सिंह समाजवादी पार्टी के नेता थे और राजसभा के सांसद भी रह चुके थे। अमर सिंह अपने रहस्यमई संबंधों के लिए लोकप्रिय थे। उनकी मौत के बाद कई पत्रकारों ने कहा कि “अपने सीने में कई राज दफन किए अमर सिंह चले गए।” लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे अमर सिंह ने 1 अगस्त 2020 को आखिरी बार सांस लिया।

राहत इंदौरी

हाल के वर्षों में अपनी शायरी और ग़ज़लों के लिए खूब चर्चा में रहे राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी, 1950 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। उनका वास्तविक नाम राहत कुरैशी था लेकिन इंदौर शहर से रिश्ते के कारण उनका नाम राहत इंदौरी पड़ गया। राहत इंदौरी उर्दू के बड़े जानकार थे और एक विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य के प्रोफेसर भी रहे थे। शेर पढ़ने के अपनी निराले अंदाज के कारण दुनिया भर के मुशायरों में राहत इंदौरी की मांग बढ़ती चली गई। उन्होंने हिंदी फिल्मों के कई गाने भी लिखे। सत्ता विरोधी शायरी के लिए राहत इंदौरी खूब सुर्खियों में रहा करते थे। 2019 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे आंदोलनों में राहत इंदौरी के ग़ज़लों की गूंज चारों तरफ सुनने को मिलीं। 11 अगस्त, 2020 को खराब स्वास्थ्य ने भारत से एक रत्न राहत इंदौरी को छीन लिया।

प्रणव मुखर्जी

भारत के तेरहवें राष्ट्रपति और लंबे राजनीतिक अनुभव वाले प्रणव मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर, 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में हुआ था। बंगाली पृष्ठभूमि से होने के कारण प्रणव मुखर्जी को प्यार से प्रणब दा कहा जाता था। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कद्दावर नेता थे, जिन्होंने केंद्रीय सरकारों में कई भूमिका निभाई थी। प्रणव मुखर्जी इंदिरा गांधी की सरकार में वित्त मंत्री रह चुके थे। इसके अलावा उन्होंने अलग-अलग सालों में विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के रूप में भी देश की सेवा की। 2012 में वे भारत के राष्ट्रपति बने और अगले पांच सालों तक देश के प्रथम नागरिक बने रहे।
31 अगस्त, 2020 को उनकी मृत्यु हो गई।

एसपी बालासुब्रमण्यम

SPB के नाम से लोकप्रिय पार्श्वगायक, संगीत निर्देशक श्रीपति पण्डितराध्युल बालासुब्रमण्यम का जन्म 4 जून, 1946 को आंध्रप्रदेश में हुआ था। अपनी बेहतरीन गायकी और अद्वितीय आवाज के दम पर उन्होंने कई बड़े भी पुरस्कार जीते हैं। सलमान खान की लोकप्रिय फिल्म मैंने प्यार किया के सभी गाने एसपी बालासुब्रमण्यम ने ही गाया था। इस फिल्म के गाने आज तक लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। एसपीबी ने करीब 16 भाषाओं में लगभग चालीस हजार गाने गाए हैं। उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण पुरस्कार से नवाजा जा चुका था। 25 सितम्बर को एसपी बालासुब्रमण्यम की चेन्नई में मौत हो गई।

रामविलास पासवान

भारतीय राजनीति में दलित जागृति का जब भी जिक्र होगा राम विलास पासवान का नाम जरूर लिया जाएगा। बिहार के खगड़िया जिले में 5 जुलाई, 1946 को राम विलास पासवान का जन्म एक अनुसूचित जाति परिवार में हुआ था। राम विलास पासवान ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में छह प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल को नजदीक से देखा था। वे हाजीपुर से सांसद रहे थे और कांग्रेस के यूपीए से लेकर भाजपा के एनडीए सरकारों तक केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे थे। राम विलास पासवान की छवि एक चुनावी मौसम वैज्ञानिक की रही थी जो चुनाव से पहले ही समझ जाते थे कि कौन सी राजनीतिक दल सत्ता में आने वाली है और उसके साथ गठबंधन कर लिया करते थे। राम विलास पासवान ने दलितों के नेतृत्व के लिए लोक जनशक्ति पार्टी बनाई थी। जिसके सर्वेसर्वा अब उनके बेटे चिराग पासवान हैं। राम विलास पासवान की मौत 2020 के क्रूर साल में 8 अक्टूबर को हो गई।

सौमित्र चटर्जी

19 जनवरी, 1935 को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में जन्मे सौमित्र चटर्जी सिनेमा जगत के सम्मानित नाम थे। सौमित्र चटर्जी ने बतौर अभिनेता सत्यजीत रे की फिल्मों में अभिनय किया था। सत्यजीत रे की फिल्म अपूर संसार से सौमित्र चटर्जी ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। अपने शानदार काम के लिए सौमित्र चटर्जी को राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मी जगत का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी प्राप्त था। भारत के तीसरे सर्वोच्च पुरस्कार पद्म भूषण के साथ ही फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान लीजन द ऑनर से भी सौमित्र चटर्जी नवाजे जा चुके थे। 15 नवंबर 2020 को सौमित्र चटर्जी ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

धर्मपाल गुलाटी

मसालों की दुनिया के सबसे बड़े व्यवसाई धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च, 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। धर्मपाल गुलाटी के पिता मसालों की दुकान चलाते थे जिसका नाम महाशियान दी हट्टी (एमडीएच) था। धर्मपाल गुलाटी भी अपने पिता के इस काम में सहयोग करते थे। लेकिन 1947 में जब देश आजाद हुआ और मुल्क दो भागों में बंट गया तब वे दिल्ली आ गए और यहीं अपना कारोबार शुरू किया। उनके मसालों के ब्रांड MDH का नाम आज हर कोई जानता है। इस ब्रांड के एंबेसेडर भी वे खुद ही थे जिसकी वजह से उन्होंने खूब लोकप्रियता अर्जित की। 3 दिसंबर, 2020 को धर्मपाल गुलाटी की मौत हो गई।

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