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किसान आंदोलन में अब थाली पीटने की बारी, कल होगा भूख हड़ताल

by Khabartakmedia

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों द्वारा देशव्यापी आंदोलन चलाया जा रहा है। तीनों कृषि कानूनों में सरकार और किसानों के बीच कई बिंदुओं पर असहमतियां बनी हुई हैं। लेकिन सबसे ज्यादा खींचातानी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर चल रही है। किसानों का साफ कहना है कि सरकार तीनों कृषि कानून वापस ले। जबकि केंद्र की भाजपा सरकार की मनोस्थिति इस दिशा में बिल्कुल भी नहीं है।
रविवार की देर शाम किसान नेताओं ने एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया था। दिलचस्प है कि एक ही समय पर इधर किसानों का प्रेस कांफ्रेंस चल रहा था और उधर पश्चिम बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह की।
प्रेस को संबोधित करते हुए स्वराज इंडिया पार्टी के प्रमुख और किसान आंदोलन का पुरजोर समर्थन कर रहे योगेन्द्र यादव ने बताया कि “हम लोगों ने तय किया है कि कल (सोमवार) को 24 घंटे का भूख हड़ताल शुरू किया जाएगा। ये भूख हड़ताल देश के सभी धरना स्थलों पर होगा।”

योगेन्द्र यादव

वहीं भारतीय किसान यूनियन के किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि “हर साल 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाया जाता है। मैं सभी से निवेदन करूंगा कि 23 दिसंबर को दिन का खाना ना खाएं।” राकेश टिकैत ने इस तरह से किसान दिवस के दिन भारत की जनता को एक समय का भोजन छोड़कर किसान आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।

राकेश टिकैत

पीएम के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान पिटी जाएगी थाली:
आगे भारतीय किसान यूनियन के ही किसान नेता जगजीत सिंह डलेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि “27 दिसंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मन की बात कर्यक्रम करेंगे। हम सभी लोगों से अपील करते हैं उस दिन सभी लोग जितनी देर प्रधानमंत्री अपने कार्यक्रम में बोलेंगे उतनी देर तक थाली पीटते रहें।”

जगजीत सिंह डलेवाला

गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण के शुरुआती दिनों में पीएम मोदी ने देश की जनता से अपील की थी कि कोरोना योद्धाओं के सम्मान में एक तय तारीख पर शाम को 5 बजे 5 मिनट तक ताली, थाली बजाएं। तब प्रधानमंत्री की खूब आलोचना हुई थी इस बात को लेकर। हालांकि अब ताली और थाली पीटना भारत की राजनीति का हिस्सा बन चुका है। जब भी केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध करना होता है तो उसमें थाली पीटने का रिवाज जरूर देखने को मिलता है।

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