Latest News
Home शिक्षा काशी विद्यापीठ शिक्षक सत्याग्रह: कुलसचिव डॉ. साहेब लाल मौर्य के आश्वासन ने फंसाया पेंच?

काशी विद्यापीठ शिक्षक सत्याग्रह: कुलसचिव डॉ. साहेब लाल मौर्य के आश्वासन ने फंसाया पेंच?

by Khabartakmedia

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संविदा शिक्षकों का सत्याग्रह शुक्रवार को भी जारी रहा। पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में तकरीबन 78 संविदा शिक्षक पिछले 12 दिनों से पंत प्रशासनिक भवन के सामने सत्याग्रह कर रहे हैं। सभी संविदा शिक्षक पिछले चार महीने की वेतन भुगतान के साथ ही अपने सेवा विस्तार की भी मांग कर रहे हैं। बता दें कि गत गुरुवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टी. एन. सिंह और सत्याग्रही शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल के बीच पूर्वांचल विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ अध्यक्ष और महामंत्री की मध्यस्थता के बाद वार्ता हुई। कुलपति ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया की इस मामले पर एक बैठक की जाएगी। लेकिन संविदा शिक्षक लिखित आश्वासन मिलने की वजह से अभी भी अपना सत्याग्रह चला रहे हैं।

कुलसचिव का चौंका देने वाला मौखिक आश्वसान:
संविदा शिक्षक सत्याग्रह के पहले ही दिन से यह बात दोहरा रहे हैं कि विश्वविद्यालय के आला तंत्र ने लगातार मौखिक तौर पर वेतन भुगतान करने की आश्वासन दी मगर अब अपनी बात से पलट रहे हैं। इन सब के बीच आज खबर तक मीडिया के साथ बातचीत में एक शिक्षक ने नाम उजागर न करने की शर्त पर यह कहा कि “कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने तालाबंदी के दौरान मुझे और अन्य कई संविदा शिक्षकों को कहा कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 20-20 e-content अपलोड कीजिए और अपनी नियुक्ति ले जाइए।”
गौरतलब है कि संविदा शिक्षक करार के अनुसार एक निश्चित अवधि तक के लिए विश्वविद्यालय से जुड़े होते हैं। लेकिन विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् के एक नियमावली में इन 78 संविदा शिक्षकों की कार्य अवधि के विस्तार की बात कही गई थी। बकौल सत्याग्रही संविदा शिक्षक तालाबंदी के दौरान अपने वेतन भुगतान और सेवा विस्तार की बात कहे जाने पर हर बार कुलसचिव डॉ. साहेब लाल मौर्य ने मांग पूरी करने का मौखिक आश्वासन दिया।
विश्वविद्यालय के एक अन्य शिक्षक (जो इस सत्याग्रह में शामिल नहीं हैं) ने भी गुप्त बातचीत में बताया कि “संविदा शिक्षकों का सारा मामला विश्वविद्यालय के कुलसचिव के कारण फंसा हुआ है। यदि कुलसचिव ने इन शिक्षकों को कई बार आश्वासन नहीं दिया होता तो आज ये नौबत नहीं आती और संविदा शिक्षक सत्याग्रह नहीं कर पाते।”

Related Articles

Leave a Comment