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कांग्रेस का दोहरा चरित्र, पंजाब में गन्ना किसानों को कैप्टन अमरिंदर ने उलझाया

by Khabartakmedia

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर देशभर में खूब बहस छिड़ी हुई है। सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी कृषि कानूनों के फायदे गिना रही है तो वहीं विपक्षी होने का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं। कृषि कानून को लेकर कांग्रेस का विरोध भले राजनीतिक हो लेकिन पिछले एक महीने से भी अधिक समय से देश के किसान दिल्ली के बॉर्डर पर और अन्य जगहों पर आंदोलन कर रहे हैं। किसान इन कृषि कानूनों के खिलाफ हैं और वे इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत भी चल रही है। लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का विरोध दोहरे चरित्र वाली लगती है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड सांसद राहुल गांधी लगभग हर दिन कृषि कानूनों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार से सवाल पूछते हैं ट्विटर पर, जो कि उनका संवैधानिक अधिकार है। लेकिन कांग्रेस की सरकार वाले राज्य पंजाब में इस समय गन्ना किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल रविवार की शाम एक प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता जंगवीर सिंह ने पंजाब सरकार की ढुलमुल रवैए को लेकर आज सवाल किया। पंजाब के गन्ना किसानों की बात उठाते हुए जंगवीर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनके मामले को जल्दी देखने की बात कही। जंगवीर सिंह ने कहा कि “गन्ना दर मांग पत्र पंजाब सरकार को दिया गया था, लेकिन डेढ़ महीने बीत चुके हैं और पंजाब सरकार ने जवाब नहीं दिया है। जबकि पंजाब सीएम ने कहा था कि 1 सप्ताह के भीतर अधिसूचना जारी की जाएगी। हम पंजाब सरकार से इस मामले को देखने की अपील करते हैं।”

जंगवीर सिंह, किसान नेता (तस्वीर:ANI)

अब इस बात पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को जवाब देना चाहिए कि वो और उनके नेता राहुल गांधी किसान आंदोलन की शुरुआत से ही किसानों का समर्थन अगर करते आ रहे हैं तो फिर गन्ना दर मांग पत्र का जवाब डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी क्यों नहीं दिया गया? क्या कांग्रेस कृषि कानून का विरोध करके सिर्फ सुर्खियां बटोरना चाहती है?
सिंघू बॉर्डर पर बैठे किसान नेता ओंकार सिंह ने कहा कि “आज 37 वां दिन है, सरकार को अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए। जब तक कानूनों को वापस नहीं लिया जाता, हम वापस नहीं जाएंगे। यह निराशाजनक है कि किसान अपनी जान गंवा रहे हैं। इतने सारे किसान ठंड का सामना कर रहे हैं लेकिन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है।” गौरतलब है कि पिछले दो दिनों से दिल्ली और आसपास के इलाकों में हाड़तोड़ ठंड तो पड़ ही रही है साथ में मूसलाधार बारिश भी हो रही है। बारिश ने ठंड और भी बढ़ा दी है और किसानों को भयंकर तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। ठंड और बारिश के बीच किसान अपना आंदोलन चला रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन के किसान नेता हरमीत सिंह ने बताया कि आने वाले 13 जनवरी को किसान कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर लोहड़ी का त्योहार मनाएंगे। साथ 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन को आजाद हिन्द किसान दिवस के रूप में मनाएंगे।

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