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आज से चार साल पहले भारतीयों को लगा था नोटबंदी का झटका, बताया गया था “मास्टरस्ट्रोक”

by Khabartakmedia

आज से ठीक चार साल पहले यानी 8 नवम्बर, 2016 को रात 8 बजे भारत के प्रधानमंत्री अचानक टेलीविजन स्क्रीन पर आते हैं और भारतवासियों को एक संदेश देकर जाते हैं। उस रात प्रधानमंत्री के भाषण ने पूरे देश के लोगों को हिला कर रख दिया था। लोग बार बार ऐसा सोच रहे थे कि क्या सचमुच पीएम जो बोल कर गए हैं, क्या वो हकीकत है या फिर है एक बुरा सपना! दरअसल भारत के प्रधानमंत्री कोई काम साधारण नहीं करते हैं। ऐतिहासिक कार्यों और फैसलों का ढेर है उनके नाम पर। पीएम मोदी के लिए हर आम ऐतिहासिक ही है। 8 नवम्बर, 2016 की रात आठ बजे का फैसला भी ऐतिहासिक ही था। प्रधानमंत्री ने उस रात ऐलान किया कि “आज रात बारह बजे के बाद पांच सौ और हज़ार के नोट वैद्य नहीं रहेंगे।” अर्थात् उस दिन के बाद पांच सौ और हज़ार के नोट नहीं चलेंगे। अर्थशास्त्र की भाषा में इसे “नोटबंदी” कहा जाता है। भारत में तब तक पांच सौ और हज़ार के नोट ही सबसे बड़े थे (मूल्य के आधार पर)। केंद्र की भाजपा सरकार और लोकप्रिय तौर पर मोदी सरकार के अनुसार नोटबंदी के फैसले से कालाधन पर लगाम लगने वाला था, भ्रष्टाचार पर मार पड़ने वाली थी और  आतंकवाद की कमर टूटने वाली थी। मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले को हर बार की ही तरह सरकार समर्थक रुख रखने वाली मीडिया ने “मास्टरस्ट्रोक” बताया।


न्यूज एंकर्स का जीपीएस सिस्टम:
स्वाभाविक तौर पर मीडिया ने इस फैसले को भी जनहितकारी और उम्दा घोषित करने के लिए अलग-अलग खबरें पेश की गई और नए आयाम समझाए गए। प्राइम टाइम के कई बड़े एंकरों ने यह तक बताया कि “दो हजार के नए नोट में नैनो साइज जीपीएस सिस्टम लगा रहेगा, जिससे कि एक जगह पर बहुत सारे नोट इकट्ठा करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और सरकार को इसका पता चल जाएगा। इस तरह कोई भी व्यक्ति कालाधन जमा करके नहीं रख सकेगा।” इस महावैज्ञानिक व्याख्यान से भारत एक बार फिर सावधान हो गया लेकिन इस खबर के धागे उसी प्रकार उधड़ गई जैसे कि नोटबंदी के फैसले के ऐतिहासिकता की।


अब तक नहीं आ सका कोई विश्वस्त आंकड़ा:
नोटबंदी को अब चार साल पूरे हो चुके हैं लेकिन आज तक ऐसा कोई विश्वस्त आंकड़ा सरकार की ओर से जारी नहीं किया गया है, जिससे पता चल सके कि नोटबंदी के फैसले से कितना कालाधन खत्म हुआ। नोटबंदी के कारण देश को क्या लाभ हुआ इसका कोई विश्वसनीय आंकड़ा अब तक मौजूद नहीं है। मोदी सरकार बता सकती थी कि नोटबंदी ने किस स्तर पर आतंकवाद की कमर तोड़ी? जिस मास्टरस्ट्रोक से देश भर के लोग एटीएम के बाहर कतार लगा कर खड़े हो गए अपने नोट बदलवाने के लिए, उसने भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा पहुंचाया? इस फैसले ने लोगों में हाहाकार मचा दिया था, कतार में खड़े कई लोगों ने अपना समय बर्बाद किया और कितनों ने अपनी जान तक गंवा दी।


मोदी नहीं करते नोटबंदी की चर्चा:
8 नवम्बर, 2016 के अपने ऐतिहासिक फैसले और मास्टरस्ट्रोक का जिक्र भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब कम ही करते हैं। नरेंद्र मोदी अक्सर अपने भाषणों में अपने फैसलों का बखान करते हैं लेकिन नोटबंदी के मास्टरस्ट्रोक को कम ही मौकों पर याद करते हैं। हालांकि नोटबंदी के चौथे सालगिरह पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट जरूर किया। पीएम ने लिखा “Demonetisation has helped reduce black money, increase tax compliance and formalization and given a boost to transparency.
These outcomes have been greatly beneficial towards national progress.”

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